राजस्थान के टोंक ज़िले में एक ऐसी पहल शुरू की गई है जो पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन रही है। जहां आमतौर पर बच्चे गणित से डरते हैं, वहां अब यही विषय बच्चों की फेवरेट बन गया है। इस बदलाव के पीछे हैं IAS अधिकारी सौम्या झा, जिन्होंने ‘पढ़ाई with AI’ नाम की एक अनोखी पहल की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि बच्चों की गणित से जुड़ी घबराहट और डर को दूर किया जाए और पढ़ाई को सरल और मज़ेदार बनाया जाए।

इस पहल के ज़रिए 350 से अधिक सरकारी स्कूलों में AI आधारित टूल्स लगाए गए हैं जो छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार पढ़ाई में मदद करते हैं। AI ट्यूटर हर बच्चे को उसके स्तर के अनुसार सवाल देता है और यदि बच्चा किसी टॉपिक में कमजोर है तो उससे जुड़े और सवाल दे कर उसकी समझ मजबूत करता है। यही वजह है कि पहले जहां छात्र गणित में 40-50 नंबर ही ला पाते थे अब वही छात्र 60-70 अंक हासिल कर रहे हैं। अमन गुर्जर नाम के छात्र ने बताया कि पहले गणित उसे बिल्कुल समझ नहीं आता था, लेकिन AI की स्टेप-बाय-स्टेप समझ और रेगुलर प्रैक्टिस की वजह से उसने बोर्ड में 65 अंक हासिल किए।
IAS सौम्या झा ने इस पहल को सितंबर 2024 में शुरू किया था। उनके अनुसार, जब वह स्कूल विजिट्स पर गईं तो उन्होंने देखा कि बच्चे बड़ी-बड़ी सपने तो देखते हैं – कोई AI इंजीनियर बनना चाहता है, कोई रोबोटिक्स सीखना चाहता है, लेकिन गणित में आत्मविश्वास की कमी की वजह से वे साइंस स्ट्रीम चुनने से कतराते हैं। इसके अलावा, गांवों में किसान परिवारों में बच्चों की स्कूल उपस्थिति भी सीजन के अनुसार बदलती रहती है, खासकर रबी की फसल के समय। साथ ही शिक्षक भी चुनाव ड्यूटी जैसी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं जिससे पढ़ाई का स्तर प्रभावित होता है। इन सभी समस्याओं का हल AI में ढूंढते हुए सौम्या ने यह टेक्नोलॉजी बच्चों की शिक्षा में उतारी।
AI ट्यूटर की सबसे खास बात यह है कि यह दो भाषाओं हिंदी और अंग्रेज़ी में बच्चों को पढ़ाता है। शिक्षक किसी भी चैप्टर से सवाल चुन सकते हैं और AI उसी जैसे ढेरों सवालों की एक सीरीज़ बना देता है। इस सिस्टम में fill in the blanks, true/false, short answer जैसे वो सारे सवाल शामिल किए गए हैं जो परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं लेकिन किताबों में नहीं मिलते। इससे छात्रों को वास्तविक परीक्षा की तैयारी करने में काफी मदद मिलती है। इतना ही नहीं, हफ्ते भर के परफॉर्मेंस पर आधारित रिपोर्ट और टेस्ट भी तैयार किए जाते हैं जिससे बच्चे और शिक्षक दोनों को पता चलता है कि किस टॉपिक में और सुधार की ज़रूरत है।
इस पहल का असर 2025 के बोर्ड परिणामों में साफ दिखा। गणित में 96.4 प्रतिशत छात्र पास हुए जो पिछले वर्ष से तीन प्रतिशत ज़्यादा है। पहले जहां 23 प्रतिशत छात्र ही फर्स्ट डिवीजन ला पाते थे, इस बार वह आंकड़ा 28.23 प्रतिशत तक पहुंच गया। राज्य भर की तुलना में टोंक ने कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। ‘पढ़ाई with AI’ पोर्टल सिर्फ 6 हफ्तों के लिए एक्टिव था लेकिन इतने कम समय में भी उसने जो असर डाला, वह चौंकाने वाला है।
अब सौम्या झा इस मॉडल को अंग्रेज़ी और विज्ञान जैसे विषयों में भी लागू करना चाहती हैं। उनका मानना है कि अगर टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल हो तो शिक्षा की दुनिया में क्रांति लाई जा सकती है। टोंक की यह पहल यह साबित करती है कि अगर सही सोच, सही तकनीक और सच्ची नीयत हो तो बच्चों के लिए कोई भी विषय मुश्किल नहीं होता। AI के ज़रिए शिक्षा को अब हर कोने तक पहुंचाना संभव हो गया है और यह सिर्फ एक शुरुआत है।
Source: thebetterindia.com
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