AI बना दुश्मन या साथी? AWS की 17% ग्रोथ के बाद भी Amazon ने कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता!

Vidyut Paptwan | 22/07/2025
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17 जुलाई की सुबह Amazon के कई कर्मचारियों के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपनी क्लाउड यूनिट Amazon Web Services (AWS) से सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी कर दी। खास बात यह रही कि इन कर्मचारियों को ईमेल के जरिए अचानक सूचना दी गई कि उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई है और उनके सिस्टम को डिएक्टिवेट किया जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब AWS की कमाई में 17% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है और कंपनी का रेवेन्यू पहली तिमाही में $29.3 बिलियन तक पहुंच गया है। बावजूद इसके, कंपनी ने अपने कई अनुभवी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

AI cuts hundreds of Amazon jobs

AI की वजह से क्यों हो रही हैं छंटनियाँ?

Amazon के CEO एंडी जेसी पहले ही यह संकेत दे चुके थे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनी आने वाले समय में कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर सकती है। आज के समय में AI से न केवल डाटा एनालिसिस बल्कि सॉफ्टवेयर कोडिंग, क्लाइंट कम्युनिकेशन और रिपोर्टिंग जैसे काम भी ऑटोमेट हो चुके हैं। इससे लागत में भारी कटौती होती है और कंपनियों को कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही कारण है कि Amazon जैसे टेक जायंट्स अब मानवीय संसाधनों की जगह AI का अधिक प्रयोग कर रहे हैं।

स्पेशलिस्ट ग्रुप भी नहीं बच पाया छंटनी से

इस बार की छंटनी में AWS के ‘स्पेशलिस्ट्स ग्रुप’ पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ये वे कर्मचारी थे जो सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर नए प्रोडक्ट आइडियाज पर काम करते थे और पहले से मौजूद सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करते थे। लेकिन अब यह कहा जा रहा है कि इन स्पेशलिस्ट्स की जरूरत कम होती जा रही है क्योंकि AI इनकी जगह ले रहा है। Amazon ने अपने बयान में कहा है कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके और ग्राहक अनुभव को और बेहतर बनाया जा सके।

क्या AI इंसानों की नौकरी का अंत है?

Amazon की यह छंटनी केवल एक कंपनी की कहानी नहीं है। इस साल Microsoft, Meta और CrowdStrike जैसी कंपनियां भी लेऑफ्स कर चुकी हैं और इनमें से अधिकांश मामलों में AI और ऑटोमेशन को ही कारण बताया गया है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनियां तेजी से AI को अपना रही हैं, जिससे एक ओर प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है लेकिन दूसरी ओर नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या AI इंसानों का साथी है या दुश्मन? क्या यह तकनीक हमें बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगी या लाखों लोगों को बेरोजगारी के दलदल में धकेल देगी? जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन इतना तय है कि AI की रफ्तार को अब कोई रोक नहीं सकता।

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